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Pracheen gyanएक बार एक हंस और उसकी पत्नी हंसिनी दोनों सोचने लगे कि हम ऐसा करते हैं हमारे बच्चों को यहां दाना पानी नहीं रहा है इसलिए हमें कहानी बाहर चलना चाहिए दोनों उड़ने लगते हैं और उड़ान के दौरान उन्हें रात्रि हो जाती है वे दोनों सोते हैं कि हम ऐसी जगह ठहर जाएं जो जगह सुरक्षित हो उन्हें एक बरगद का पेड़ दिखाई दिया वे दोनों उसे बरगद के पेड़ पर जाकर के ठहर जाते हैं उसे बरगद के पेड़ पर एक उल्लू रहता था उल्लू रात्रि में बोलना था आधी रात के समय उल्लू बोलने लगा तो हंस और हंसिनी कहने लगे कि यह जो खेड़ा पड़ा हुआ है यह इसीलिए उजाड़ हो गया है क्योंकि यह उल्लू बोलता है और इस उल्लू के बोलने के कारण इस गांव में कोई इंसान नहीं रहा है उल्लू उनकी यह सभी बातें सुन रहा था अब तो उल्लू ने क्या किया दोस्तों गांव में गया और अपने पांच पटेलन को बुलाकर के ले आया कहने लगा की क्या करें इसने हमसे इस तरह से कहा है कि इस गांव को उजाड़ दिया है उल्लू ने पंच पटेल हमसे कहने लगे हंस इसने क्यों उजाड़ दिया है क्या उल्लू के बोलने से खेड़ा उजाड़ ही जाता है पटेल कहने लगे यह कोई बात थोड़ी है किसी के गांव में तुम इस तरह से कहने लगो किसीके बोलनेइस बात को सुनकर पंचों ने उसे पर दंड किया तुम अपनी पत्नी को हमारे उल्लू के लिए दे जाओ और तुम चले जाओ यही दंड है इस बात को सुनकर कहने लगा उल्लू क्या करें यह हंसिनी कहीं हमसे संतुष्ट हो पाएगी वापस अंश को बुलाया और कहने लगे हंस तुम तुम्हारी पत्नी अपने साथ ले जाओ यह खेड़ा ना हमने उजाड़ किया है ना तुमने यह तो इन पांच पटेलन ने ही उजाड़ दिया है आता है दोस्तों पंच पटेल अब न्याय नहीं करते हैं जय हिंद जय भारत जय जय श्री राधे जय जय श्री रामCopy and paste the AdSense code in between the tags of your site
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