और अपनी प्रेमिका, जोकि वेश्या थी। उससे मिलने के लिए पहुंचने वाले थे कि रास्ते में मृत्यु ने घेर लिया। तब उन्होंने एक मंदिर में वह धन भगवान शिव को अर्पित कर दिया और अंतिम सांस ली।
जब उनकी आत्मा मृत्यु के देवता यमराज के सामने उपस्थित हुई तो आत्मा का लेखा-जोखा हुआ। चित्रगुप्त ने जुआरी से कहा, तुमने एकमात्र पुण्य भगवान को धन दान के रूप में किया है।
यमराज ने कहा, तुमने पुण्य तो बहुत कम किए हैं लेकिन तुम्हारा यह पुण्य काफी प्रभावशाली है, इसलिए तुम्हें दो घड़ी के लिए इंद्र बनाया जाएगा। इस तरह उस जुआरी की आत्मा दो घड़ी के लिए यमराज के आदेशानुसार इंद्र बनाई गई।
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इंद्र बनने के बाद जुआरी अप्सराओं-गंधर्व के नृत्य और सुरापान का आनंद ले ही रहा था, तभी नारदजी देवलोक आए। वह यह सब देखकर हंस दिए। उन्होंने कहा, 'यदि इस बात में संदेह हो कि स्वर्ग-नर्क हैं तब भी सत्कर्म तो कर ही लेना चाहिए वर्ना तो आस्तिक का कुछ नहीं बिगड़ेगा, पर हुए तो नास्तिक जरूर मारा जाएगा।'
यह बात सुनते ही उस जुआरी को होश आ गया। उसने दो घड़ी में ऐरावत, नंदन वन समेत पूरा इन्द्रलोक दान कर दिया। इसके प्रताप से वह पापों से मुक्त हो इंद्र बना और जब जुआरी का धरती पर जन्म हुआ तो वह राजा बलि के नाम से प्रसिद्ध हुए।
विरोचन के पुत्र थे बलि
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वैदिक काल में कश्यप ऋषि हुए थे। उनकी पत्नी दिति थीं। जिनके के दो पुत्र हुए नाम थे हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष थे।
हिरण्यकश्यप के 4 पुत्र थे। जोकि क्रमशः अनुहल्लाद, हल्लाद, भक्त प्रह्लाद और संहल्लाद। और प्रह्लाद के कुल में विरोचन के पुत्र राजा बलि का जन्म हुआ।
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