मित्रों नमस्कार
एक गांव में एक गरीब बुढ़िया रहती थी। उस बुढ़िया के एक लड़का था। पिता का साया। पहले ही उठ चुका था।
वह लड़का जंगल में लकड़ी काटकर और उन्हें बेचकर अपनी मां का और खुद का भरण पोषण करता था। 1 दिन क्या होता है वह लड़का जंगल में लकड़ी काटने हेतु गया था। उसी समय उसे एक छोटे गड्ढे में एक मछली दिखाई दी। उस मछली को देखकर लड़का प्रसन्न हुआ और सोचने लगा इससे आज शाम के वक्त की सब्जी बन जाएगी। ऐसा सोच कर उस लड़के ने उस मछली को उठा लिया दोस्तों मछली चिकनी होती है वह उसके हाथ में से छूट गई अब तो दोस्तों वह लड़का मछली को उठाए तो गट्ठर गिरे और लकड़ियों के गट्ठर को उठाए तो मछली गिरे।
अचानक ऐसा होता है उस लड़के को आकाश मार्ग से अप्सराएं देख रही थी जो उसे उठा कर के उस जंगल में से दूसरे जंगल में छोड़ देती हैं जहां पर एक संत महात्मा तपस्या कर रहे थे।
संत खड़ा होकर कहता है आऔ पुत्र मैं तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा था। लड़का कहता है बाबा मैं आपका शिष्य हूं आप जो कहेंगे मैं वैसा ही करूंगा महात्मा तपस्या करता रहा और शाम के वक्त कहने लगा पुत्र अब आपको कल एक कार्य करना है आप यहां के शहर के राजा के पास जाइए और उससे कहना है कि मेरे बाबा ने कहा है तुम अपनी लड़की की शादी मेरे साथ कर दो। साधु के कहे अनुसार लड़का उस शहर के राजा के पास जाता है और कहता है ए राजा आप अपनी लड़की की शादी मेरे साथ कर दो नहीं तो अच्छा नहीं होगा राजा ने कहा कोई पागल आ गया है इसको जाने दो लेकिन मंत्री कहने लगे नहीं महाराज इसने उद्दंडता की है इस को दंड दिया जाए लेकिन राजा के कहने से उसके सैनिक और मंत्री उसे छोड़ देते हैं।
लड़के ने सहारा समाचार आकर के महात्मा को सुना दिया महात्मा कहने लगा आप दुबारा जाइए। तो लड़का फिर से उस राजा की सभा में गया और कहने लगा ए राजा आपने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया राजा कहने लगा क्या बात थी मैंने कहा था कि आप अपनी लड़की की शादी मेरे साथ कर दो यह सुनकर के राजा कहने लगा इसको पकड़ लो और पूछने लगा आप कौन हो और कहां से आए हो इस पर लड़का कहने लगा मैं और मेरा गुरु आपके पास के जंगल में तपस्या करते हैं और यह मेरे गुरु का आदेश है कि आप अपनी लड़की का संबंध मेरे साथ कर दें।
इस बात को सुनकर राजा कहने लगा हम हमारी लड़की का संबंध आपके साथ कर देंगे। लेकिन आपको और आपके गुरु को एक शर्त पूरी करनी है। लड़का कहने लगा बताइए महाराज। राजा ने कहा हमारे किले के चारों तरफ परकोटा खिंच जाना चाहिए। वह पर कोटा भी एक रात में पूर्ण हो जाना चाहिए।
लड़का यह सुनकर अपने गुरु के पास आ जाता है। और समस्त समाचार सुना देता है। महात्मा कहने लगा आप दिन में आराम कीजिए और रात्रि के ठीक 12:00 बजे मुझे जगा देना।
लड़का इस प्रकार दिन में सोता रहा और रात्रि के ठीक 12:00 बजे बैठा हो कर अपने गुरु से कहने लगा। चलो गुरु जी 12:00 बज चुके हैं। महात्मा ने कहा ठीक है मेरे इस कमंडल में रेत भर लो अर्थात मेरी धूनी में से राख भर लो। और एक बोरा अपने कंधे पर और लग लिया महात्मा ने और एक बोरा उस शिष्य के कंधे पर लग दिया कमंडल में भी राख भर ली। और महात्मा ने कहा इस बोरा के एक कोने में छेद कर दो जिससे यह राख गिरती चलेगी।
गुरु की यह बात सुनकर लड़के ने उस बोरे के कोने में छेद कर दिया और राख फैलती जा रही थी कहने लगा महात्मा इस शहर के चारों तरफ घूम जाइए मैं आपके साथ साथ चल रहा हूं इस प्रकार दोनों गुरु और शिष्य उस शहर के चारों तरफ घूम निकले। और दोनों उस रात को चारों तरफ गिराते हुए वापस अपने आश्रम पर आ गए।
प्रातः काल हुआ तो लोग देखते हैं। शहर के चारों तरफ एक दीवार खड़ी हुई है जिसमें गेट कहीं पर नहीं है यह सूचना राजा के पास पहुंची कि महाराज हम शहर से बाहर नहीं जा सकते। उस दिन में साधू लड़का आया था। उसने रात रात में ही यह दीवार खड़ी कर दी है परंतु उसने दरवाजा कहीं नहीं छोड़ा है। जैसे तैसे नशा नहीं लगा कर एक सैनिक महात्मा के पास भेजा और कहा कि आपने दीवार तो बना दी परंतु दरवाजा नहीं छोड़ा है। महात्मा कहने लगा अपने महाराज से कह दो की दीवार तो हमने बना दी दरवाजा आप अपने मित्रों से स्वयं निकलवा ले।
सैनिक ने आकर राजा से कह दिया तो राजा ने अपने कारीगर बुला करके दरवाजा निकलवा लिए।
अब तो राजा अपने मंत्रियों के साथ खुशी खुशी महात्मा के आश्रम पर आया और उसके उस शिष्य की सगाई कर दी। और विवाह के लिए कह दिया मेरे यहां पर 20000 बारात लेकर के आनी है। इस बात को सुनकर वह लड़का कुछ काम करने लगा कि यहां पर तो हम दो गुरु से से हैं परंतु 20000 की बारात हम कैसे ले जाएंगे। महात्मा कहने लगा चिंता ना करो। ठीक रात्रि के 12:00 बजे महात्मा फिर से खड़ा हुआ और आपने शिष्य से कहने लगा फिर से 1 बोरा उठाइए और उसमें राख भर लो। राख भर के दोनों गुरु शिष्य उस जंगल में जाते हैं और चंद्रमा की चांदनी खेल खेल रही थी। महात्मा कहने लगा अब आप इन वृक्षों पर निमंत्रण दाल डालते जाइए। राख को लेकर वह लड़का जिस किसी भी देवता का नाम लेकर निमंत्रण देता वही देवता प्रकट होकर निमंत्रण स्वीकार करता। इस प्रकार 20000 देवताओं को निमंत्रण दे दिया।
जिस दिन बारात जानी थी। उस दिन सभी देवता महात्मा के आश्रम पर आ जाते हैं। और महात्मा कहता है मेरी कुटिया में चले जाओ और वहां से सामान लेकर सभी के लिए भोजन बनाओ इस प्रकार उनमें से कुछ एक जो हलवाई का कार्य जानते थे उन्होंने हलवाई का कार्य किया और सभी ने भोजन किया। दूसरे दिन सभी बारात में चल दिए लड़के के लिए स्वयं इंद्रदेव रथ लेकर के उपस्थित हुए अब तो सुंदर रखो को लेकर बारात जा रही है। पहुंच जाते हैं राजा की बस्ती में। शुक्र और शनि दोनों छोटे छोटे बच्चा बन जाते हैं। और रोने लगते हैं कि हमको भूख लगी हुई है। जैसे ही राजा जनवा से को देखने आया तो उसी समय उन दोनों छोटे बच्चों को रोते हुए देख कर अपने सैनिक से कहने लगा। इन दोनों बच्चों को घर ले जाओ और इन को खाना खिला दो।
वह सैनिक राजा की आज्ञा पाकर और दोनों बालक रूपी शुक्र शनि को अपने किले में ले जाता है जहां पर राजा ने भोजन व्यवस्था कर रखी थी। और उनको भोजन खिलाता है लेकिन बच्चे से निकले कि समस्त खाना साफ कर गये। यह देख कर वह सैनिक भागकर महाराज के पास पहुंचा और कहने लगा महाराज गजब हो गया। बे छोटे छोटे बालक हमारे यहां का समस्त खाना खा गए।
यह सुनकर राजा आश्चर्य में पड़ गया और कहने लगा जल्दी से बारात की निकासी करवा दो। और फेरे डलवा दो। इस प्रकार सैनिकों ने शहर में बारात की निकासी करवा दी और जल्दी से बारोट ही करवा दी। दूल्हे को फेरों पर बिठा दिया गया। इस प्रकार विवाह हो जाता है।
राजाओं के रिति होती है। विवाह होने पर दूल्हा और लड़की चित्र सारी पर सोते हैं। इस प्रकार वह लड़का अपनी दुल्हन के पास चित्र सारियों पर गया। वहां पहुंचते ही अपनी पत्नी से कहने लगा। विवाह के समय में दूल्हा था। मुझे किसी ने भोजन नहीं कराया। मुझे भूख लगी हुई है कुछ खाने को दो। यह सुनकर राजा की लड़की कहने लगी आप की बारात इस प्रकार की आई है क्यों उसने कुछ भी नहीं छोड़ा जो मैं तुम्हें खाने को लेकर आऊं।
लेकिन मेरे पास मैं गुड्डी गुड़िया से खेलती थी उनके चावल रखे हैं मैं उन्हें मेरी साड़ी जलाकर के पका देती हूं और तुम खाना खा लेना।
वह लड़की उन चावलों को अपनी साड़ी फाड़कर पका रही थी। मैं क्या होता है दूल्हा गायब हो जाता है। और आपने उसी स्थिति में पहुंच जाता है जहां पर वह लकड़ी के गट्ठर को उठाए तो मछली गिरी और मछली को उठाएं तो गट्ठर गिरे।
इस प्रकार वह लड़का घर आ जाता है। जब राजा को यह पता चला कि दूल्हा कहां गया कहां बरात गई और कहां हुए महात्मा गया। तू राजा मन में सोचता है यह कैसा असर यह है यह हुआ तो क्या हुआ। लेकिन लड़की कहती है। पिताजी मेरे साथ जो घटित हुआ है मैं उसको सच करके छोडूंगी। मैं मेरे उस पति को ढूंढ कर छोडूंगी। राजा कहने लगा पुत्री आप क्या करोगी। कहने लगी आप ऐसा करो मुझे कुछ सैनिक दे दो और मैं गांव गांव खेल तमाशा करूंगी उसमें बढ़िया से कलाकार दे दो। राजा ने वैसा ही किया। लड़की गांव गांव जाकर तमाशा दिखाने लगी। सैनिकों की डर के कारण कोई भी उसके तमाशे में बिकने नहीं डालता था। अरे रात्रि को बहुत अच्छा नाटक मंचन करती थी।
और बीच-बीच में अपने उन चावलों को निकालती और अपनी साड़ी को फाड़ कर जलाकर दिखाती। और सैनिकों से कह देती थी कि जाओ देखो कोई क्या बतला रहा है। अचानक वह लड़की उसी गांव में आ जाती है जहां पर वह लड़का और उसकी मां रहते थे। चारों तरफ दौड़ी पिट गई की रात्रि को नाटक मंचन होता है तो सभी लोग उस नाटक को देखने जा रहे थे। कुछ एक लोगों ने कहा उस गुड़िया के लड़के को भी ले चलो। तो उसे भी साथ ले गए। और जब वह नाटक आधा हो गया उस समय बीच में अपने उस खेल को करने लगी जो उसके साथ घटित हुआ था। वह चावल निकाल कर लाए और कलाकारों में से एक दूल्हा बनाया और कहने लगी कि मुझे भूख लगी हुई है मैंने कुछ नहीं खाया है तुम मुझे कुछ खाने को दो। इस प्रकार का वह नाटक कर रही थी। चावल निकाल कर अपनी साड़ी को फाड पका रही थी। सैनिक पब्लिक में घूम रहे थे कि देखते हैं कोई क्या कहता है। यह सब देख कर वह बुढ़िया का लड़का कहने लगा कि साथियों यह समस्त घटना मेरे साथ घटित हुई है मेरी पत्नी ने इसी तरह मुझे चावल बनाए थे पता नहीं वह कहां रह गई। यह बात एक सैनिक ने सुन ली और उसने जाकर के राजा की लड़की को बता दिया एक लड़का इस तरह से कह रहा है वह सैनिक उस लड़के को पकड़कर लड़की के पास मंच पर ले जाता है। लड़की ने उसे पहचान लिया कहने लगी कि आपके साथ क्या घटित हुआ था मैं आपसे कुछ नहीं कहूंगी। कहने लगा अभी आपने जो नाटक दिखाया था यह मेरे साथ घटित हुआ था। इस बात को सुनकर लड़की पर्दे के पीछे जाती है और अपनी उस असली साड़ी को पहन के उस लड़के को आवाज लगाती है कि आप अंदर पर्दे में आ जाइए। जैसे ही लड़का पर्दे के अंदर जाता है और देखता है कि वहां पर उसकी पत्नी है कहने लगा तू मुझे आज पा गई ऐसा कह कर के उस लड़की के गर्ल भैया डालने लगा। लड़की ने कह दिया अब आप सभी अपने घरों को जा सकते हो। और आज से तमाशा बंद किया जाता है मुझे मेरा पति मिल गया है जाकर महाराज से
कह देना। राजा की लड़की उस बुढ़िया के पास आके उसके पैरों को दबाती है और कहती है कि मैं आपकी बहू हूं। बुढ़िया ने सारा हाल पूछा और बुढ़िया प्रसन्न होती है। इसके पश्चात राजा ने बहुत सारे हाथी घोड़ा रथ और बहुत सा सामान दहेज में उस गुड़िया के घर पहुंचाया।
शिक्षा भगवान छप्पर फाड़ कर देता है।

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