नमस्कार दोस्तों
एक बार लंकापति रावण स्वर्ग में जाना चाहता था और देखना चाहता था किस स्वर्ग में प्राणी किस प्रकार निवासक रोशनी स्वर्ग जाने का विचार कर लिया।
एक व्यक्ति जोगी देवताओं का प्रतिनिधि था वह स्वर्ग जा रहा था अपने विमान से। रावण कहने लगा भाई मैं स्वर्ग को देखना चाहता हूं इसलिए आप मुझे स्वर्ग ले चलो। दोस्तों रावण न खूब एड़ी चोटी का दम लगाया था परंतु स्वर्ग को नहीं जीत पाया और रावण ने क्या किया पुष्प रान के साथ व स्वर को जाता है।
जैसे ही रावण और वह प्राणी स्वर्ग पहुंचे तू एक रानी कहने लगा ऐसा है आप यहीं पर प्रतीक्षा करो और मैं इंद्रदेव से आगे ले करके आता हूं। इंद्रदेव से आज्ञा लेने के लिए वह प्राणी स्वर्ग के अंदर चला जाता है दरवाजे पर रावण खड़ा रह जाता है परंतु रानी को बहुत समय हो चुका था इसी कारण रावण ने स्वर्ग के दरवाजे को पकड़ के हिला दिया।
अंदर से किसी बुजुर्ग के रोने की आवाज आई और वह कहने लगा यह करके मुझे किसने सता दिया। मेरे कुल में मेरा एक ऐसा नाती हुआ है जिसके अपराधों के कारण स्वर्ग के समस्त देवताओं ने मिलकर स्वर्ग के गेट के चचुऔं को मेरे नेत्रों पर रख दिया है जैसे यह दरवाजे खुलते हैं। मेरे नेत्रों में दुख होता है मैं क्या करूं राम यहां के मुझे किसने सता दिया मेरे नेत्रों से खून बहने लग गए हैं।
रावण सोचने लगता है यह तो मेरा बाबा है मेरे अपराधों के कारण इसके नेत्रों पर देवताओं ने मिलकर स्वर्ग के गेट के सचिवों को रख दिया है कहने लगा बाबा रावण तो मैं ही हूं परंतु मुझे ऐसा पता नहीं था अब आप यह उपाय बताएं। जिससे आपक नेत्रों से एलगेटो के चश्मे को हटा दिया जाए। ऋषि पुलस्त कहने लगे रावण ऐसा है। भगवान का भजन कर जिससे तेरे अपराध क्षमा हो जाएंगे और मेरे नेत्रों से यह भार उतर जाएगा रावण कहने लगा नहीं बाबा मैं तामसी देह का आदमी हूं मुझसे भगवान का भजन नहीं हो सकता कोई अन्य उपाय बताइए ऋषि कहने लगा पुत्र दो ही उपाय हो सकते हैं या तो भगवान का भजन करो या फिर उनका विरोध करो रावण कहने लगा मैं तो भगवान का विरोध ही कर सकता हूं तो दोस्तों रावण ने भगवान श्रीराम का विरोध किया और उनके हाथों से मुक्ति पाई तो दोस्तों यदि एक बाबा दुष्कर्म करता है या अपराध करता है उसके कर्मों का परिणाम उस के नाती पोते को भोगना पड़ता है।
और यदि नाती अपराध करता है तो उसके कर्मों का फल बाबा को भोगना पड़ता है।
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