चारों युगों में कैसे हुई लड़ाई? कलयुग ने क्यों मांगा भगवान शिव से न्याय।


 नमस्कार मित्रों

एक बार चारों युग एक स्थान विशेष पर इकट्ठे हुए। चारों अपनी अपनी बडाई करने लगे, सतयुग कहने लगा। तुम सभी में मैं बड़ा हूं। मेरे राज्य में हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु जैसे बलवान पैदा हुए। हिरण्याक्ष पृथ्वी को उठाकर ले गया। तब स्वयं श्री हरि विष्णु ने 12 अवतार धारण किया।


इसके पश्चात त्रेता युग कहने लगा मैं आपसे कोई काम नहीं हूं।

मेरे शासनकाल में भी रावण कुंभकरण जैसे योद्धा हुए उन्हें मारने के लिए स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री हरी विष्णु अवतार हुए।


द्वापर युग कहने लगा आप दोनों से मैं भी कम नहीं हूं। मेरे युग में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। जो 16 कलाओं से उत्पन्न हुए थे। और भीष्म और भीम जैसे महाबली योद्धा मेरे युग में थे।

कलयुग कहने लगा आप सभी ने मुझे छोटा समझा है। परंतु आपको पता नहीं मेरा शासनकाल आप सभी से अच्छा है। मेरे शासनकाल में मशीनों की भरमार है इंसान में बुद्धि की कोई कमी नहीं है। आपके युगों में ताकत से काम लिया जाता था। परंतु आप बुद्धि से काम लेते हैं। मेरे युग का इंसान सुख सुविधाओं में भरपूर है। आप के शासनकाल में इंसान को मच्छर खाया करते थे परंतु आप बटन दबाया और पंखा चल जाता है कूलर चल जाता है एसी चला देते हैं। आदमी सुख की नींद सोता है।

तीनो लोग कहने लगे , कलयुग हम आपकी इस बात से सहमत नहीं है। कलयुग कहने लगा चलो हम भगवान शिव के पास चलते हैं। भाई कोई न्याय करेंगे।

चारों युग भगवान शिव के पास जाते हैं। अपनी अपनी श्रेष्ठता के बारे में बताते हैं।

भगवान शिव ने उनकी परीक्षा के लिए एक बहुत बड़ा कढाह रख दिया। जिसमें हजारों मन बजन था। और कहने लगे सबसे पहले सतयुग की बारी है यह अपने युग का आदमी या भेजेंगे और यह चावल का ढेर लगा हुआ है।

 इस कढाह मैं चावलों को पका कर मेरे 500 गणों को भोजन करिवेगा। सतयुग ने एक इन्सान भेजा। उस इंसान ने भट्टी  खोदकर कढिह को उठाकर उस पर रख दिया और भोजन पका कर समस्त गणों को भोजन करा दिया।

इसके पश्चात त्रेता युग की बारी आई। त्रेता युग ने भी अपने युग का एक आदमी भेजा उस आदमी ने भी भट्टी खोदकर एक हाथ से कड़ा को उठाकर भट्टी पर रख दिया और चावलों को पका कर समस्त गणों को भोजन करवाया।

इसके पश्चात द्वापर युग की बारी आई। उसने भी अपने युग का एक आदमी भेजा उस आदमी ने भी भट्टी खोदकर कड़ा को दोनों हाथों से उठाकर भट्टी पर रख दिया और चावलों को पका कर समस्त गणों को भोजन करा दिया।

भगवान शिव कहने लगे कलयुग तुम इस प्रतिस्पर्धा में भाग मत लो क्योंकि तुम्हारे पास इतनी ताकत नहीं है। लेकिन कलयुग कहने लगा नहीं प्रभु मैं यह कार्य मेरे युग के आदमी से करवा सकता हूं। मेरे युग के आदमी में बहुत अधिक वुद्धि है। भगवान शिव ने कहा ठीक है। कलयुग ने अपना आदमी भेजा जो की बहुत ही छोटे कद का था। उस आदमी ने कढाह के नीचे ही भट्टी खोद दी। और चावलों को पका दिया।

इसके पश्चात भगवान शिव के गणों से कहने लगा मुझे बैठने के लिए एक कुर्सी लेकर आओ और आप में से चार लोग आ जाओ सभी को भोजन के लिए बैठा दो मैं कुर्सी पर बैठा रहूंगा। यह सुनकर गण प्रसन्न होते हैं। और सोचते हैं यह आदमी कितना अच्छा है जिसने यह नेक काम करने के लिए हमें भी अवसर दिया। उन गणों ने सभी को भोजन करवाया।

यह सब देख कर भगवान से हंसने लगे और कहने लगे ताकत से बढ़कर बुद्धि होती है।

कलयुग ने मुझसे कहा था मेरे युग में सभी व्यक्ति बड़े सुख से रहते हैं। गर्मी लगने पर पंखा , कूलर, एसी आदि चला देते हैं। पानी के लिए बटन दबाकर बोर चला देते हैं। फसल काटने के लिए कंपास जैसी मशीन का उपयोग करते हैं। इसलिए सबसे अच्छा राज्य और श्रेष्ठ कलयुग है। तुम तीनों ने ताकत से कार्य किया। लेकिन इस युग के व्यक्ति ने बुद्धिमानी से काम किया।

शिक्षा - बल से बढ़कर बुद्धि होती है।




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