नमस्कार दोस्तों।
एक बार एक घोड़ी वाला एक गांव में होकर निकल रहा था और उसकी घोड़ी के साथ एक छोटा बच्चा और था। ग्रीष्म काल का समय था वह अपनी घोड़ी और बच्चे को साथ लेकर पैदल पैदल चल रहा था वह गांव ठग लोगों का था। ठंग कहने लगे, कितनी दोपहरी पड़ रही है अरे भाई आराम कर लो और पानी पी लो। घोड़ी वाला बेचारा भले आदमी समझ कर ठहर जाता है।
और उनके बंगले में ही सो जाता है। जब 4:00 बज चुके थे।
वह जागता है परंतु देखता है कि उसकी घोड़ी का बच्चा वहां पर नहीं है। तो वे उन ठगों से कहता है अरे भाई मेरी घोड़ी का बच्चा ला दो आपने किधर बांध दिया है। यह सुनकर ढंग कहने लगे। आप हमारी समस्त बातों को मानोगे और हम आपकी सभी बातों को मानेंगे। घोड़ी वाला कहने लगा भाई मानेंगे। तो ठग कहने लगे भाई यह बच्चा हमारे बैल कैसे पैदा हुआ है। यह आपकी घोड़ी का बच्चा नहीं है यह हमारे बैल का बच्चा है इसलिए हमारा हुआ।
घोडी वाले ने कह दिया। ठीक है भाई परंतु अब मैं कहूंगा वह बात आपको माननी पड़ेगी। थोड़े समय पश्चात वह कहने लगा परसों के दिन की बात है मेरे गांव में आंधी झक्कड़ तूफान आया मैं उस समय घर पर नहीं था और मेरी पत्नी मेरी छान को रोकने के लिए बरेंडे को पकड़े हुए थी। परंतु छप्पर के साथ उड़कर यहां आ गई है। दोस्तों एक ठग की लड़की एक छान के डरेंगे को पकड़े हुए थी। उसे देखकर ही उस घोड़ी वाले ने ऐसा कहा था। और कहने लगा देखो सामने मेरी पत्नी छप्पर को पकड़े हुए हैं यह मेरी है मैं इसे ले जाऊंगा
ऐसा कहकर अपनी घोड़ी को लेकर और उन ठगों की लड़की को साथ लेकर अपने गांव को चला जाता है। ठग दुखी हुए, परंतु चार भाई थे कहने लगे आपस में हम रात में ही इसके गांव में पहुंचकर अपनी लड़की को वापस ले आएंगे और इस को जान से मार देंगे। इस तरह विचार कर ठग चल देते हैं। और पहुंच जाते हैं उस घोड़ी वाले के गांव में। दोस्तों उसका गांव दूर था इसलिए मैं रात में नहीं पहुंच पाए और उनको दूसरा दिन हो गया। अब कहने लगे ठीक है इसी घर पर चलते हैं किसी से पूछ कर उसके घर पहुंच गए।
इधर घोड़ी वाले ने दो खरगोश खरीद लिए एक खरगोश को अपनी चक्की के हथेली से बांध दिया। और दूसरे को अपने साथ जंगल में ट्यूबेल पर ले गया जहां उसने अपने पशुओं के लिए ग्रीष्म काल में हरा चारा उगा रखा था। ठगों ने अपनी लड़की से पूछा कहां गया है वह वह लड़की कहने लगी खेतों पर गया है। तो बेटा कहने लगे अभी लड़की को यहीं रहने दिया जाए पहले हम उस घोड़ी वाले को मार के आएंगे। चले जाते हैं जंगल में ट्यूबेल पर। उसके पास ट्यूबेल पर एक खरगोश बंधा हुआ था। उन्हें आते हुए देखकर खरगोश से कहने लगा जाओ तुम घर को जाओ और हमारी पत्नी से कह देना खाना बना ले उसके भाई आ गए हैं ऐसा कहकर खरगोश को छोड़ देता है और खरगोश कहीं जंगल में भाग जाता है। ठग सोचने लगते हैं कि देखते हैं क्या सचमुच में खरगोश ने सूचना दी है कहने लगे चलो घर चलते हैं जब बे उस घोड़ी वाले को घर लेकर आए तो देखा एक खरगोश उसके घर पर चक्की के हथेली से बंधा हुआ है और उसने सूचना दे दी है। ठग आश्चर्य करते हैं। और कहते हैं आप अब आपके खरगोश का क्या मूल्य लेंगे। घोड़ी वाला कहने लगा ₹20000 इसका मूल्य है।
ठगों ने ₹20000 दे दिए और खरगोश को खरीद लिया। धीरे-धीरे वह दिन गुजर गया और रात्रि हो गई ठग सोचने लगे कि अब हम इसको रात में ही मार देंगे परंतु उसने एक युक्ति सोची। वह एक धनकुटा बनवा कर लाया। धनकुटे को लेकर ठगों की पुत्री से कहता है तुम मेरी पत्नी तो अब हो ही गई हो इसलिए मैं धनकुटा जमीन में मारूंगा और तुम बहाना बनाकर मर जाना और जब मैं इस धनकुटे को तुम्हारे ऊपर फिर आऊं तब तुम जीवित हो जाना।
दोस्तों को अंधेरा हुआ ही था। घोडी वाले ने उस लड़की की पिटाई शुरू कर दी। और धनकुटा को बार-बार जमीन में मार रहा था। डाक बंगले में से आकर देखते हैं कि घोड़ी वाले ने उनकी लड़की को मार दिया है। ठग कहने लगे हम तुझे छोड़ेंगे नहीं तूने हमारी लड़की को मार दिया है परंतु वह कुछ करते उससे पहले घोड़ी वाला कहने लगा अरे क्यों गम करते हो। मैं इसको को जीवित कर देता हूं। ऐसा कहकर धनकुटा को उसके ऊपर घुमा दिया और वह लड़की जिंदा होकर खड़ी हो गई। ठग आश्चर्य करने लगे इसके पास तो धनकुटा बहुत अच्छा है। कहने लगे इस धान कोटा का क्या लोगे। घोड़ी वाला कहने लगा ₹50000 होंगे। यह सुनकर उन्होंने ₹50000 मैं उस धनकुटे को खरीद लिया।
चारों भाई कहने लगे इसको बाद में मारेंगे। और अपने घर को वापस चले जाते हैं। चारों भाई पहले अपनी अपनी पत्नियों को उस धनकुटे से मार देते हैं। परंतु वे धनकुटे को अपनी पत्नियों पर घुमाते हैं तो वे जीवित नहीं होती हैं। चारों भाई सोचते हैं हमारे साथ धोखा हो गया चलो आज ही हम उस घोड़ी वाले को समाप्त कर देते हैं। चारों भाई जाते हैं और उसको सोते हुए को उसकी खाट में बांध देते हैं बड़ी रस्सियों से। और उसे खास है तो उठा ले जाते हैं एक कुए के घाट पर रख देते हैं तब तक रात्रि के 4:00 बज चुके थे। कहने लगे हम जब तक जंगल झाड़ी हो लेते हैं तब तक इसको यहीं बंद रहने दो। चारों भाई जंगल झाड़ी होने जाते हैं।
दोस्तों एक गडरिया जिसने अपनी भेड़ों को 2 दिनों से जंगल में नहीं छोड़ा था। वह विचार कर रहा था मेरी भेड भूखी मर रही है इसलिए मैं जल्दी प्रातः काल ही मेरी भेड़ों को खोल दूंगा। इस प्रकार हुए अपनी पड़ों को ले जाकर जंगल में पहुंच जाता है। उसमें पर पहुंचता है तो देखता है कि एक व्यक्ति खाट में मोटे मोटे राशिय से
बंधा हुआ है। कहने लगा हे भाई तुम इस तरह इस खाट में मोटी रस्सियों से क्यों बंधे हुए हो। घोड़ी वाला कहने लगा, आज के दिन जो भी व्यक्ति इस तरह खाट में बन जाएगा वह बहुत अधिक धन प्राप्त कर लेगा। यह सुनकर गडरिया कहने लगा मैं तुम्हे खोल देता हूं। तुम मुझे इस खाट में इन रस्सियों से बांध दो। इस प्रकार अपने स्थान पर उस गडरिया को बांध दिया जाता है। और उसकी पेड़ों को लेकर वह घोड़ी वाला आगे बढ़ जाता है।
जब चारों भाई जंगल झाड़ी होकर वापस हुए पराए उन्होंने धक्का मार के खाट को कुएं में गिरा दिया। कहने लगे मर गया होगा इसमें चलो घर को चलते हैं। चारों भाई जब जा रहे थे और आगे बढ़े तो देखते हैं घोड़ी वाला उनके सामने भेड़ चरा रहा है। वे आश्चर्य करने और कहने लगे तुम तो हमने कुएं में डाल दिए थे तुम कैसे बच गए तो घोड़ी वाला कहने लगा । तुम नहीं जानते हो आज के दिन जो भी व्यक्ति इस तरह कुएं में गिर जाएगा उसको बहुत अधिक धन मिलेगा उसको राजपाट मिलगा। मुझे तो केवल भेड ही मिली है। ऐसा सुनकर ठग कहने लगे। अरे भाई तुम हमको उतनी में डाल दो। घोड़ी वाले कहने लगा चलो ठीक है। इस प्रकार चारों ठगों को कुएं में डाल देता है और चारों में मर जाते हैं।
घर आकर ठग की लड़की से कहता है अब आराम से मेरे महलों में मेरे घर पर मेरी पत्नी बन कर रहो तुम्हारे लिए धन्यवाद।
जाऊंगा
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