नमस्कार दोस्तों,
एक बार महाराज दशरथ शिकार खेलने हेतु जंगल में गए थे। इन्होंने संपूर्ण दिन जंगल का भ्रमण किया परंतु इन्हें कोई शिकार नहीं मिली। इस प्रकार महाराज को प्यास लगी और यह पानी की तलाश करने लगे। उस समय महाराज कन्नौज के पास एक तालाब था वहां पहुंच जाते हैं।
दोस्तों पूर्व में इस कन्नौज का नाम अंग देश माना जाता था। यहां पर एक ताल था और उसे यह वरदान था। कि जो भी इसमें स्नान करेगा और जलपान करेगा वह विपरीत लिंगी हो जाएगा अर्थात पुरुष है तो स्त्री बन जाएगा और स्त्री है तो पुरुष बन जाएगा।
इस प्रकार महाराज दशरथ कन्नौज के तालाब में। अपने घोड़े को पानी पिलाते हैं और खुद पीते हैं तथा उसमें स्नान भी करते हैं। ऐसा करने से महाराज स्त्री बन जाते हैं। और सोचने लगते हैं मेरे साथ यह क्या हुआ मैं कौन था यह भी उनको पता नहीं रहता है और एक सुंदर स्त्री बनके उस तालाब के किनारे खड़े हो जाते हैं। उसी समय अंग देश का राजा रूम पाद आ जाता है। वह देखता है किक सुंदर स्त्री तालाब के किनारे खड़ी हुई है। महाराज रोमपाद जब यह देखते हैं तो कहने लगे आप कौन हो और आपके कौन माता-पिता हैं आप हमारे महलों लायक हैं हम आपको हमारी रानी बना चाहते हैं।
प्रथम दृष्टया स्त्री बने हुए महाराज दशरथ ने उस राजा से मना कर दिया। लेकिन जब देखते हैं कि मैं अब आयोध्या नहीं जा सकता मुझे तो इस रूम पाद के साथ ही जाना चाहिए। इस प्रकार महाराज दशरथ रोमपाद राजा की रानी बन जाते हैं। और महाराज दशरथ के घर से एक लड़की उत्पन्न हुई जिसका नाम सांता रखा गया।
जो मंत्रियों ने खूब ढूंढा महाराज दशरथ को लेकिन उनका पता नहीं चला तो वे अंग देश के राजा के यहां पहुंचे। वहां पर सुमंत देखता है उनके राजा स्त्री बन चुके हैं। जब उन्होंने जाकर महाराज को यह याद दिलाया कि आप महाराज दशरथ हैं तो वह कहने लगे कि आप मेरी विदाई करवा दो यहां से और मैं अयोध्या चलने को तैयार हूं। इस प्रकार मंत्री जाकर के राजा रूम पाद से सब कुछ बता देता है तो रूम पाद कहने लगता है ठीक है मैं भी आपके साथ चलता हूं।
जिस तालाब में महाराज ने स्नान किया था उसी तालाब में फिर से महाराज को लाया गया और उसमें जैसे ही स्नान किया तू पुणे नारी से नर हो गए इस प्रकार रूम पाद वापस चला जाता है और मित्रता का हाथ बढ़ाता है महाराज दशरथ से। कहता है महाराज मुझे नहीं पता था फिर भी आपका जहां भी कोई भी कार्य पड़ेगा मैं उसमें हमेशा आपके साथ रहूंगा।
दोस्तों महाराज दशरथ के कोई संतान नहीं थी। महाराज दशरथ कहने लगे कैसे लड़की का क्या होगा। दोस्तों उस लड़की का पालन पोषण महाराज रोमपाद के महलों में हुआ। और उसका विवाह ऋषि श्रंग के साथ हुआ।
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