गीता के अनुसार स्त्री बड़ी है या पुरुष

 दोस्तों नमस्कार,

एक बार अर्जुन भगवान श्री कृष्ण के पास द्वारका में पधारे हुए थे। भगवान कृष्ण माता रुक्मणी की कुछ गुलामी करते हुए नजर आए। इस पर अर्जुन कहने लगा। अरे कन्हैया आप खूब हैं बना रुक्मणी की गुलामी कर रहे हो। क्या स्त्री इंसान से बढ़कर है जो आप इतनी गुलामी करते हो। इस बात को सुनकर भगवान कृष्ण कहने लगे हां अर्जुन स्त्री इंसान से बड़ी है यह हम तुम्हे किसी दिन बता देंगे।

यह सुनकर अर्जुन हंसने लगे इसी हंसी के बीच आराम कर लेते हैं कुछ-कुछ एक समय। और भगवान कृष्ण कहने लगते हैं। अर्जुन चलो हम और आप हरिपुर नामक शहर में चलते हैं जहां पर हम दोनों एक दूसरे के साथ मिलकर आनंद उठाएंगे।

अर्जुन कहने लगा जैसी आपकी आज्ञा कन्हैया चलो कुछ समय भी पास हो जाएगा। इस प्रकार अर्जुन और कृष्ण भगवान रात में बैठकर हरिपुर नामक शहर में पहुंच जाते हैं जहां पर बहुत सी वस्तुएं बिक रही थी पशुओं की भी बिक्री हो रही थी और क्या देखते हैं k1 सौदागर काट के घोड़े बेच रहा था। अर्जुन कहने लगा प्रभु यह काट के घोड़े किस काम आते हैं। भगवान कृष्ण कहने लगे चलो अर्जुन चलकर सौदागर से पूछते हैं।


इस प्रकार भगवान कृष्ण और अर्जुन सौदागर के पास जाते हैं और पूछते हैं यह काट के घोड़े किस काम आएंगे इस पर सौदागर कहने लगा यह आकाश में उड़ते हैं और सभी जगह समान वेग से उठते हैं। अर्जुन हंसने लगा तो सौदागर कहने लगा सच नहीं मानते हो तो मेरे एक घोड़े की पीठ पर आप बैठ जाओ और उड़ कर देख लो। भगवान कृष्ण जी अर्जुन को प्रेरित करते हैं और कहते हैं अर्जुन बैठ कर देख लो।


इस प्रकार अर्जुन एक घोड़े की पीठ पर बैठ जाता है। सौदागर बड़ा चतुर था उसने कोड़ा उस घोड़े की पीठ में जमा दिया और घोड़ा उड़ने लगा थोड़ी दूरी पर तो वह काम कम उड़ने लगा लेकिन जैसे ही ऊंचाई पर बड़ा तो तेजी से उड़ने लगा जोकि पर्वत पठार समुद्र आदि को लंगता हुआ अर्जुन को लिए जा रहा था आसमान में।


अर्जुन चिल्लाने लगा और कहने लगा बचाओ बचाओ लेकिन उस स्थान पर कौन सुनने वाला था घोड़ा क्या करता है अर्जुन को एक लटकती घाटी में ले जाता है। जहां पर एक कुश का पेड़ जिसे दाब का पेड़ कहते हैं। खड़ा था अर्जुन ने उस डाब के पेड़ को पकड़ लिया और घोड़ा अर्जुन के नीचे से निकल जाता है अब तो उस लटकती घाटी में अर्जुन उस पेड़ के तंतुओं से लटका रह जाता है।


अर्जुन नीचे की तरफ देखता है तो नीचे गहरी नदी बह रही है ऊपर देखता है तो चल नहीं सकता और होता क्या है इसी बीच एक बनवासी नहीं आती है जिसका काला का लूटा स्वरूप था और कहती है अर्जुन तुम मुझसे शादी कर लो यह सुनकर अर्जुन जलाता है और कहता है मैं तुझ से शादी नहीं कर सकता जब अर्जुन ने इंकार कर दिया तो वह वापस चली जाती है। और एक चुहिया का रूप रखे आती है। और उन तत्वों को काटने लगती है। अर्जुन घबराने लगा यदि आज भीम भैया होता तो मेरी अवश्य मदद करता लेकिन अब मैं क्या करूं। अर्जुन सोचने लगा क्यों ना मैं उस बनवास नहीं से विवाह कर लेता हूं। अर्जुन आवाज लगाता है और कहता है अरे बनवास नी मैं आपसे विवाह करना चाहता हूं। दोस्तों चिड़िया चली जाती है और बनवास नी का रूप धर कर आ जाती है। अर्जुन से कहती है क्या आप विवाह के लिए तैयार हैं। अर्जुन हां कह देता है ‌ इस प्रकार अर्जुन और बनवा सनी का विवाह हो जाता है।


थोड़ी समय पश्चात अर्जुन के संतान पैदा होने लगी और 12 बच्चे पैदा हो गए। अर्जुन को वहां पर 24 साल बीत चुके थे। 1 दिन अर्जुन को पुणे वहीं घोड़ा दिखाई दिया। अर्जुन कहने लगा अब मैं तेरी पीठ पर फिर से नहीं बैठ सकता क्योंकि तेरा कोई पता नहीं तू कहां ले जा कर छोड़ेगा। लेकिन यह तो भगवान कृष्ण की माया थी अर्जुन धीरे-धीरे उस घोड़े के पास जाता है। और उसकी पीठ पर बैठकर। उस घोड़े से उड़ने की कहता है। घोड़ा फिर से उड़ने लगता है। अर्जुन सोचने लगा अब यह ना जाने मुझे कहां ले जाकर डालेगा

। घोड़ा अर्जुन को वापस उसी मेले में ले आता है। जहां पर भगवान कृष्ण और सौदागर अर्जुन की प्रतीक्षा कर रहे थे। अर्जुन जब उतर जाता है घोड़े से, तो भगवान कृष्ण कहते हैं बताओ अर्जुन घोड़ा कैसा था। अर्जुन कहता है घोड़ा काफी अच्छा है। लेकिन थोड़े समय पश्चात उस मेले में जो अर्जुन की पत्नी थी वह आती है और कहती है मुझे धोखा देकर के यह अर्जुन आया है। और यह कहीं भी भाग ले मैं उसको जाने नहीं दूंगी। भगवान कृष्ण कहने लगे अर्जुन यह सब कुछ क्या है। अर्जुन कहने लगा प्रभु यह तो सचमुच स्त्री पुरुष से बड़ी होती है। अब आप चाहे जैसा करो।

भगवान कृष्ण कहते हैं अर्जुन अपने नेत्र बंद कर लो और अब आपको द्वारका के किले पर खड़ा पाओगे।


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