माता सीता के जन्म का रहस्य कौन थी माता सीता।।


 मित्रों नमस्कार आप हमारी वेबसाइट पर पधारे आपके लिए धन्यवाद आज हम आपके लिए कुछ ऐसे रहस्य बताने जा रहे हैं माता सीता कौन थी?


माता सीता के अजीब रहस्य।।


एक बार की बात है भगवान शिव से पार्वती माता कहने लगी की है प्रभु मैं ना जाने कितने सालों से मरती जीती हू।। लेकिन आपने मेरे लिए माता सीता के जन्म की कथा नहीं सुनाई आप से मेरा निवेदन है मुझे माता सीता के जन्म की कथा सुनाएं।।


भगवान शिव कहने लगे-हे पार्वती आप माता सीता के जन्म की कथा सुने।।

 

एक बार की बात है एक बार रावण ने सोचा हमारे राज्य की सीमाओं में जो ऋषि मुनि रहते हैं यह कोई टैक्स क्यों नहीं देते हैं चलो आज हम इनसे टैक्स लेने जाते हैं तो रामायण ऋषि मुनियों के पास में पहुंच जाता है और आपने चंद्रहास खड़क को निकालकर कहता है ।।




कि हमारे लिए टैक्स दो तुम हमारे राज्य में रहते हो दोस्तों रावण कटक पुर का राजा था लंका का राजा पीछे बना है होता क्या है।।



 इसने ऋषि यों से उनका रक्त टैक्स के रूप में लिया उस रक्त को यह एक पात्र में लेकर लंका को चला जाता है जिसे एक कक्ष में रखवा देता है और उसकी चाबी अपने खुद के पास रखता है 1 दिन भूल से चाबी रह जाती है तो मंदोदरी उस चाबी को लेकर जाती है और उस कक्ष को खोल देती है कक्ष को खोलने के पश्चात उस पात्र को देखती है और उसको सूंघ जाती है ।।



हे पार्वती उसके पश्चात मंदोदरी गर्भवती हो जाती है और वह सोचती है यह मेरे साथ क्या घटित हुआ है वह चिंतित होने लगती है इसके पश्चात हे पार्वती वह रावण के पास जाती है और रावण से कहती है महाराज मैंने सुना है कि आपकी गर्जना से स्त्रियों के गर्भ गिर जाते हैं रावण कहने लगा हां तो मंदोदरी कहने लगी आप मुझे गर्ज कर बताइए।।


रावण जोर से गरजने लगा रावण के गरजने से मंदोदरी का गर्भ छीण हो जाता है और मंदोदरी ने एक लड़की को जन्म दिया उस लड़की को मंदोदरी ने वापस उसी कक्ष में उस पात्र में रख दिया उसके पश्चात लंका में अपसकुन होने लगे।।


हे पार्वती रावण कहने लगा क्या कारण है कि हमारी लंका में अनायास ही अकाल पड़ने लग गया और आपस में प्रजा लड़ने लगी है भुखमरी फैलने लगी है इस पर मंदोदरी कहने लगी महाराज रावण आपको पता है जो खून का पात्र आप लेकर आए हो उस पात्र को अपने यहां से कहीं दूसरे स्थान पर पहुंचा दो नहीं तो ऐसा ही होगा ।।



इस प्रकार की बात सुनकर रावण सोचता है मंदोदरी ने ठीक ही कहा है क्योंकि यह रक्त ऋषि-मुनियों का है क्यों ना मैं इसे जनक के बाग में गढ़वा दू इस प्रकार अपने परिजनों से घड़े को पुष्पक विमान में रखवा कर जनक के बाग में गढ़वा देता है।।



ऐसा करने के पश्चात रावण की लंका में फिर से बरसात होने लगी परंतु महाराज जनक का बगीचा सूख गया महाराज जनक परेशान हो गए महाराज जनक ने अष्टावक्र जैसे विद्वानों को बुलाकर कहां मेरा बाग क्यों सूख रहा है तो उन्होंने उपाय बताया आप स्वयं हल चलाइए महाराज आप और आपकी रानी जूए मैं जुड़ेंगे।।


और आपका कुमर हरैया डालेगा तब आपका बाग फिर से हरा हो जाएगा इस प्रकार है पार्वती महाराज जनक और रानी सुनैना दोनों जुए में जुड़ जाते हैं और उनके पुत्र हरैया डालते हैं होता क्या है उनके हल का फाल उस पात्र में अटक जाता है जिसे रावण ने गढवाया था और उसमें से एक कन्या उत्पन्न होती है उस कन्या को देखकर रानी सुनैना ने गोद में ले लिया और महाराज जनक ने कहा यह तो सीता है ।।



सीता का अर्थ हल के फाल से है।। इस प्रकार महाराज जनक ने पालन पोषण किया तो माता सीता का नाम जानकी पड़ गया विदेहजा पड़ गया और जानकी इस प्रकार उत्पन्न हुई।।














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